📜 अमरकोश
मूल श्लोक, अन्वय, सरल हिन्दी अनुवाद एवं भावार्थ सहित
३ काण्ड · २५ वर्ग · १५५१ मूल श्लोक · सभी पर अन्वय, लिङ्ग सहित सरल हिन्दी अनुवाद एवं भावार्थ
📖 अमरकोश (मूल नाम नामलिङ्गानुशासनम्) आचार्य अमरसिंह द्वारा रचित संस्कृत का सबसे प्रसिद्ध पर्यायवाची कोश है। इसमें देवता, आकाश, काल, पृथ्वी, वनस्पति, पशु-पक्षी, मनुष्य, समाज आदि विषयों के शब्द उनके लिङ्ग (पुं॰, स्त्री॰, नपुं॰) सहित श्लोकों में बाँधे गये हैं, ताकि कण्ठस्थ किये जा सकें। परम्परागत संस्कृत-शिक्षा में इसे "प्रथम पाठ्य" माना गया है।
📚 स्वर्गादिकाण्डः
८७ श्लोक१.१. स्वर्गवर्गःदेवता, ब्रह्मा-विष्णु-शिव, देवियाँ, इन्द्र, अग्नि, यम, वरुण, कुबेर आदि के नाम।
३ श्लोक१.२. व्योमवर्गःआकाश के पर्याय।
३९ श्लोक१.३. दिग्वर्गःदिशाएँ, दिक्पाल, दिग्गज, बादल, बिजली, वर्षा, चन्द्रमा, सूर्य, नक्षत्र, ग्रह।
३३ श्लोक१.४. कालवर्गःकाल — दिन, रात्रि, तिथि, मास, ऋतु, वर्ष, युग, प्रलय, भाग्य।
१८ श्लोक१.५. धीवर्गःबुद्धि, विचार, संशय, ज्ञान, मोक्ष, रूप-रस-गन्ध।
२८ श्लोक१.६. शब्दादिवर्गःवाणी, शब्द, वेद-शास्त्र, कथा, वार्ता, निन्दा-स्तुति, ध्वनि।
४० श्लोक१.७. नाट्यवर्गःसंगीत, वाद्य, नृत्य, नाटक, नव रस और भाव।
१३ श्लोक१.८. पातालभोगिवर्गःपाताल, बिल, अन्धकार, सर्प और विष।
४ श्लोक१.९. नरकवर्गःनरक और उसकी यातनाएँ।
४४ श्लोक१.१०. वारिवर्गःसमुद्र, जल, लहर, नदियाँ, जलचर, कमल।
📚 भूम्यादिकाण्डः
२० श्लोक२.१. भूमिवर्गःपृथ्वी, मिट्टी, देश, मार्ग।
२१ श्लोक२.२. पुरवर्गःनगर, घर, भवन, द्वार, सीढ़ी आदि।
९ श्लोक२.३. शैलवर्गःपर्वत, शिखर, गुफा, रत्न-धातु।
१७० श्लोक२.४. वनौषधिवर्गःवन, वृक्ष, लताएँ, फूल-फल, औषधियाँ और घास।
४६ श्लोक२.५. सिंहादिवर्गःसिंह आदि पशु, पक्षी, कीड़े और समूहवाचक शब्द।
१४१ श्लोक२.६. मनुष्यवर्गःमनुष्य, स्त्री, सम्बन्ध, आयु, रोग-चिकित्सा, शरीर के अंग, वस्त्र-आभूषण, शृंगार।
६२ श्लोक२.७. ब्रह्मवर्गःवंश, वर्ण, आश्रम, विद्वान्, यज्ञ, दान, तप, व्रत।
१२० श्लोक२.८. क्षत्रियवर्गःराजा, मन्त्री, राजनीति, सेना, हाथी-घोड़े-रथ, अस्त्र-शस्त्र, युद्ध।
१११ श्लोक२.९. वैश्यवर्गःवैश्य, कृषि, अनाज, रसोई, पशुपालन, व्यापार, माप-तौल, धन, धातु।
४७ श्लोक२.१०. शूद्रवर्गःशिल्पी, कारीगर, कलाकार, सेवक, शिकारी, जुआ आदि।
📚 सामान्यकाण्डः
ⓘ मूल श्लोक
ashtadhyayi.com के खुले डेटा से लिये गये हैं (आभार सहित)। प्रत्येक श्लोक का अन्वय, सरल हिन्दी अनुवाद एवं भावार्थ इस साइट हेतु AI-सहायता से नये सिरे से तैयार किया गया है; यह किसी प्रकाशित टीका की प्रति नहीं है। सरल समझ हेतु उपयोगी है — गहन अध्ययन के लिये प्रामाणिक टीकाएँ भी देखें।