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॥ २७ नक्षत्र-वृक्ष एवं आराध्य वनस्पति यन्त्र ॥

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जन्म नक्षत्र सम्मत पूज्य वनस्पति, रोपण दिशा, सिंचन मन्त्र एवं ग्रहदोष निवारक नक्षत्र-वाटिका विधान

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॥ वृक्षायुर्वेद : नक्षत्र-वृक्ष सेवा एवं वाटिका महिमा ॥

• प्राण-ऊर्जा का सामंजस्य: जातक के जन्म नक्षत्र का उसके आराध्य वृक्ष से सीधा ब्रह्माण्डीय स्पंदन (Cosmic Resonance) होता है। अपने नक्षत्र वृक्ष का रोपण, जल सिंचन अथवा नित्य दर्शन करने से जन्म-कुण्डली के समस्त ग्रह दोष मन्द पड़ जाते हैं।

• पर्यावरण व कुल-वृद्धि: "दशपुत्रसमो द्रुमः" — शास्त्रों में एक वृक्ष को दस पुत्रों के समान कहा गया है। अपने नक्षत्र वृक्ष को काटने अथवा क्षति पहुँचाने का पाप कभी न करें।

• स्थान अभाव में विकल्प: यदि घर में भूमि का अभाव हो, तो गमले में उस वृक्ष का छोटा रूप (बोनसाई रहित), पत्र अथवा उसकी काष्ठ की समिधा से हवन करने पर भी पूर्ण फल मिलता है।

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