पूजा के समय और स्थान का पंचांग स्वतः भरकर — पूर्ण संस्कृत संकल्प, हिन्दी अर्थ सहित
📘 संकल्प क्या है व कैसे लें
कोई भी पूजा, पाठ, जप या अनुष्ठान आरम्भ करने से पहले समय, स्थान, अपना परिचय और उद्देश्य बोलकर जो दृढ़ निश्चय किया जाता है, वही संकल्प है। बिना संकल्प के कर्म का पूर्ण फल नहीं माना जाता।
इसमें काल (कल्प, मन्वन्तर, युग, संवत्, संवत्सर, अयन, ऋतु, मास, पक्ष, तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण), देश (द्वीप, खण्ड, क्षेत्र), कर्ता (गोत्र, नाम), कामना व कर्म का उल्लेख होता है — यह सब यहाँ साइट के पंचांग-इंजन से आपके स्थान व समय के अनुसार भरा जाता है।
तिथि सूर्योदय-कालीन मानी जाती है; पूजा के समय तिथि बदल चुकी हो तो "कोई अन्य तिथि/समय" में ठीक समय डालें। क्षेत्रीय परम्परा (मास-गणना, संवत्सर-नाम) ऊपर चुनी जा सकती है।
अनुष्ठान बड़े हों तो आचार्य द्वारा संकल्प कराना श्रेष्ठ है; यह टूल सहायता हेतु है।