संवत्सर-फल — राजा-मन्त्री, मेघेश, वर्षा-धान्य-तृण आदि का वार्षिक-आकलन
राजा (वर्षेश)
संवत्सर का सम्पूर्ण-वर्ष पर शासन व दिशा-निर्धारण।
मन्त्री
राज-काज व प्रशासनिक-नीतियों की दिशा।
सस्येश
खरीफ़-फसलों (धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, तिल) की स्थिति।
सेनाधिपति
सैन्य-शक्ति, आंतरिक-सुरक्षा व सीमा-विवाद।
मेघेश
मेघ व वर्षा की दिशा।
रसेश
दूध, घी, तेल, गुड़, शर्करा जैसे द्रव-पदार्थ।
धनेश
आर्थिक-समृद्धि, राजस्व व व्यापारिक-संतुलन।
धान्येश
रबी-फसलों (गेहूं, चना, जौ, सरसों) की स्थिति।
नीरसेश
धातु, रत्न व शुष्क-पदार्थों की तेज़ी-मंदी।
फलेश
फल, फूल, औषधि व वन-संपदा।
राजा (शुक्र) व मन्त्री (मंगल) के बीच सम्बन्ध: सम
वर्ष का फल मध्यम रहेगा — न अत्यधिक-लाभ, न भारी-संकट।
☁️ इस-वर्ष का मेघ: संवर्त मेघ
प्रलयंकारी/शुष्क मेघ — वर्षा अत्यल्प, सूखे व दुर्भिक्ष (अकाल) का भय।
🌙 रोहिणी का वास: पृथ्वी (ग्राम/नगर) पर निवास
सर्वोत्तम-स्थिति — बस्तियों-खेतों पर सीधी-वर्षा, भूजल-सुधार, उत्तम-खेती व सुभिक्ष।
🌧️ वर्षा विश्वा
16/20
वर्ष-भर की समग्र जल-वृष्टि का सूचक।
समय पर अनुकूल-वर्षा होती है।
🌾 धान्य विश्वा
18/20
गेहूं, धान, चना, मक्का आदि प्रमुख-खाद्यान्नों की कुल-पैदावार।
भंडार भरे रहते हैं, बाज़ार में अनाज सुलभ-सस्ता रहता है।
🌿 तृण विश्वा
15/20
पशुओं हेतु घास-चारा-वनस्पति की उपलब्धता, दुग्ध-उत्पादन से सम्बद्ध।
घास-चारा-वनस्पति की उपलब्धता पर्याप्त रहती है — दुग्ध-उत्पादन अनुकूल।
❄️ शीत विश्वा
13/20
शीत-ऋतु की अवधि, पाला व न्यूनतम-तापमान का प्रभाव।
सामान्य-शीत रहेगी।
☀️ उष्ण विश्वा
3/20
ग्रीष्म-ऋतु की प्रचंडता, धूप, लू व उच्चतम-तापमान।
सामान्य-ग्रीष्म रहेगा।
💨 वायु विश्वा
12/20
आंधी, चक्रवात, समुद्री-तूफ़ान व मौसमी-हवाओं का वेग।
चक्रवाती-तूफ़ानों से वृक्षों, भवनों व खड़ी-फसलों को क्षति की आशंका।
🩺 रोग विश्वा
2/20
समाज में मौसमी-बीमारियां, संक्रमण व जन-स्वास्थ्य की स्थिति।
प्रजा नीरोग रहेगी।
⚠️ उपद्रव विश्वा
4/20
सीमा-विवाद, आंतरिक-अशांति, राजनीतिक-उथल-पुथल, चोरी व अपराध।
शांति व सुरक्षा का माहौल रहेगा।
ⓘ यह पारंपरिक संहिता-ज्योतिष की गणना-पद्धति है, वैज्ञानिक-मौसम/फसल-पूर्वानुमान नहीं। पूर्ण-फलादेश हेतु सूक्ष्म-पंचांग-विश्लेषण आवश्यक है।