🧭 यात्रा-विचार
दिशाशूल, योगिनी, चन्द्रवास, राहुकाल, भद्रा, पंचक व चौघड़िया — प्रस्थान से पहले एक दृष्टि
📘 यात्रा-विचार के नियम
- दिशाशूल — वार-अनुसार एक दिशा में शूल: सोम-शनि पूर्व, मंगल-बुध उत्तर, गुरु दक्षिण, रवि-शुक्र पश्चिम।
- योगिनी — तिथि-अनुसार दिशा बदलती है; सम्मुख या बाएँ अशुभ, दाहिने या पीछे शुभ।
- चन्द्रवास — चन्द्रमा की राशि से उसकी दिशा; सम्मुख व दाहिने शुभ, पीछे व बाएँ अशुभ।
- तिथि — रिक्ता (4, 9, 14) व अमावस्या वर्जित; षष्ठी, अष्टमी, द्वादशी मध्यम। नक्षत्र — अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, रेवती उत्तम।
- राहुकाल, भद्रा व पंचक (विशेषतः दक्षिण दिशा) में प्रस्थान न करें। सारी गणना साइट के पंचांग-इंजन से आपके स्थान व समय के अनुसार।
- चिकित्सा, आपदा या अनिवार्य कार्य की यात्रा में मुहूर्त की प्रतीक्षा न करें — इष्ट-स्मरण करके निकलें।