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📗 शब्द-रूपावली

किसी भी संस्कृत शब्द के आठों विभक्तियों व तीनों वचनों के रूप — मूल शब्द या कोई भी रूप (जैसे रामेण, मत्याः, तस्य) लिखें

लिङ्ग:

अस्मद् (सर्वनाम (त्रिलिङ्ग))

मैं (उत्तम पुरुष सर्वनाम) — तीनों लिङ्गों में समान

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमाअहम्आवाम्वयम्
द्वितीयामाम् / माआवाम् / नौअस्मान् / नः
तृतीयामयाआवाभ्याम्अस्माभिः
चतुर्थीमह्यम् / मेआवाभ्याम् / नौअस्मभ्यम् / नः
पञ्चमीमत्आवाभ्याम्अस्मत्
षष्ठीमम / मेआवयोः / नौअस्माकम् / नः
सप्तमीमयिआवयोःअस्मासु

ⓘ सर्वनाम/संख्या शब्दों का सम्बोधन नहीं होता।

📌 मे, नौ, नः आदि लघु (एनादेश) रूप वाक्य के आरम्भ में नहीं आते।

जाँची तालिका यह तालिका हाथ से जाँची गयी है।

अकारान्त पुंलिङ्ग

आकारान्त स्त्रीलिङ्ग

इकारान्त

ईकारान्त / ऊकारान्त

उकारान्त

ऋकारान्त / ओकारान्त

अकारान्त नपुंसकलिङ्ग

हलन्त (व्यञ्जनान्त)

सर्वनाम

संख्यावाचक

ⓘ नियमित शब्दों के रूप प्रतिमान से स्वतः बनते हैं (शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com); सर्वनाम, संख्या व अनियमित शब्दों (पति, सखि, पथिन्, पुंस् आदि) की तालिकाएँ हाथ से जाँची गयी हैं। अर्थ — आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश; पर्याय — अमरकोश। धातुओं के रूप हेतु धातु-रूपावली, किसी श्लोक के विश्लेषण हेतु श्लोकार्थ-बोधिनी।

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