किसी भी संस्कृत शब्द के आठों विभक्तियों व तीनों वचनों के रूप — मूल शब्द या कोई भी रूप (जैसे रामेण, मत्याः, तस्य) लिखें
. , कर्तृ.ए.ब . दिक् , दिग् " - दिशति ददात्यवकाशम् दिश् + क्विप् "दिशा, दिग्बिन्दु, चार दिशाएँ, परिधि का बिन्दु, आकाश का चौथाई
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | दिक् / दिग् | दिशौ | दिशः |
| द्वितीया | दिशम् | दिशौ | दिशः |
| तृतीया | दिशा | दिग्भ्याम् | दिग्भिः |
| चतुर्थी | दिशे | दिग्भ्याम् | दिग्भ्यः |
| पञ्चमी | दिशः | दिग्भ्याम् | दिग्भ्यः |
| षष्ठी | दिशः | दिशोः | दिशाम् |
| सप्तमी | दिशि | दिशोः | दिक्षु |
| सम्बोधन | हे दिक् / हे दिग् | हे दिशौ | हे दिशः |
ⓘ नियमित शब्दों के रूप प्रतिमान से स्वतः बनते हैं (शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com); सर्वनाम, संख्या व अनियमित शब्दों (पति, सखि, पथिन्, पुंस् आदि) की तालिकाएँ हाथ से जाँची गयी हैं। अर्थ — आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश; पर्याय — अमरकोश। धातुओं के रूप हेतु धातु-रूपावली, किसी श्लोक के विश्लेषण हेतु श्लोकार्थ-बोधिनी।