किसी भी संस्कृत शब्द के आठों विभक्तियों व तीनों वचनों के रूप — मूल शब्द या कोई भी रूप (जैसे रामेण, मत्याः, तस्य) लिखें
जानना, समझना, परिचित होना, प्रवीणता
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | ज्ञानम् | ज्ञाने | ज्ञानानि |
| द्वितीया | ज्ञानम् | ज्ञाने | ज्ञानानि |
| तृतीया | ज्ञानेन | ज्ञानाभ्याम् | ज्ञानैः |
| चतुर्थी | ज्ञानाय | ज्ञानाभ्याम् | ज्ञानेभ्यः |
| पञ्चमी | ज्ञानात् / ज्ञानाद् | ज्ञानाभ्याम् | ज्ञानेभ्यः |
| षष्ठी | ज्ञानस्य | ज्ञानयोः | ज्ञानानाम् |
| सप्तमी | ज्ञाने | ज्ञानयोः | ज्ञानेषु |
| सम्बोधन | हे ज्ञान | हे ज्ञाने | हे ज्ञानानि |
ⓘ नियमित शब्दों के रूप प्रतिमान से स्वतः बनते हैं (शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com); सर्वनाम, संख्या व अनियमित शब्दों (पति, सखि, पथिन्, पुंस् आदि) की तालिकाएँ हाथ से जाँची गयी हैं। अर्थ — आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश; पर्याय — अमरकोश। धातुओं के रूप हेतु धातु-रूपावली, किसी श्लोक के विश्लेषण हेतु श्लोकार्थ-बोधिनी।