॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: जानना, समझना, परिचित होना, प्रवीणता
संस्कृत: मोक्षोपयोगिबुद्धिः
व्युत्पत्ति: ज्ञा+ल्युट् (कृदन्त)
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | ज्ञानम् | ज्ञाने | ज्ञानानि |
| द्वितीया | ज्ञानम् | ज्ञाने | ज्ञानानि |
| तृतीया | ज्ञानेन | ज्ञानाभ्याम् | ज्ञानैः |
| चतुर्थी | ज्ञानाय | ज्ञानाभ्याम् | ज्ञानेभ्यः |
| पञ्चमी | ज्ञानात् / ज्ञानाद् | ज्ञानाभ्याम् | ज्ञानेभ्यः |
| षष्ठी | ज्ञानस्य | ज्ञानयोः | ज्ञानानाम् |
| सप्तमी | ज्ञाने | ज्ञानयोः | ज्ञानेषु |
| सम्बोधन | हे ज्ञान | हे ज्ञाने | हे ज्ञानानि |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| ज्ञानम् | ज्ञान (नपुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन (व्युत्पत्ति: ज्ञा + ल्युट्) अन्य सम्भावना: ज्ञान (नपुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन |
ज्ञानम् ➤ जानना, समझना, परिचित होना, प्रवीणता
संस्कृत: मोक्षोपयोगिबुद्धिः
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| ज्ञान |
दृष्टि (३.३.४५) — आँख, देखना |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
ⓘ समास के खण्ड कोश से पहचाने गए हैं; विग्रह-वाक्य व समास-प्रकार (तत्पुरुष/बहुव्रीहि आदि) अर्थ पर निर्भर करता है।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड