॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: भगवान श्रीराम
संस्कृत: श्रीरामचन्द्रः, बलभद्रः, मृगभेदः, कृष्णवर्णः, मनोरमम्, शुक्लवर्णयुक्तः · पर्याय: बलभद्र, प्रलम्बघ्न, बलदेव, अच्युताग्रज, रेवतीरमण
अंग्रेज़ी: Lord Ram
व्युत्पत्ति: रम्+घञ् (कृदन्त)
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | रामः | रामौ | रामाः |
| द्वितीया | रामम् | रामौ | रामान् |
| तृतीया | रामेण | रामाभ्याम् | रामैः |
| चतुर्थी | रामाय | रामाभ्याम् | रामेभ्यः |
| पञ्चमी | रामात् / रामाद् | रामाभ्याम् | रामेभ्यः |
| षष्ठी | रामस्य | रामयोः | रामाणाम् |
| सप्तमी | रामे | रामयोः | रामेषु |
| सम्बोधन | हे राम | हे रामौ | हे रामाः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| रामेण | राम (पुं.) — तृतीया विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: राम (नपुं.) — तृतीया विभक्ति, एकवचन |
रामेण ➤ भगवान श्रीराम
संस्कृत: श्रीरामचन्द्रः, बलभद्रः, मृगभेदः, कृष्णवर्णः, मनोरमम्, शुक्लवर्णयुक्तः · पर्याय: बलभद्र, प्रलम्बघ्न, बलदेव, अच्युताग्रज, रेवतीरमण
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| राम |
बलराम के नाम (१.१.२५) — बलभद्र, प्रलम्बघ्न, बलदेव, अच्युताग्रज, रेवतीरमण, कामपाल, हलायुध गन्धर्व, शरभ, राम, सृमर, गवय (नीलगाय), शश (खरगोश) आदि (२.५.१२) — गन्धर्व, शरभ, सृमर, गवय, शश |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.४ सेकण्ड