किसी भी संस्कृत शब्द के आठों विभक्तियों व तीनों वचनों के रूप — मूल शब्द या कोई भी रूप (जैसे रामेण, मत्याः, तस्य) लिखें
हरा, हरा-पीला
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | हरि | हरिणी | हरीणि |
| द्वितीया | हरि | हरिणी | हरीणि |
| तृतीया | हरिणा | हरिभ्याम् | हरिभिः |
| चतुर्थी | हरिणे / हरये | हरिभ्याम् | हरिभ्यः |
| पञ्चमी | हरिणः / हरेः | हरिभ्याम् | हरिभ्यः |
| षष्ठी | हरिणः / हरेः | हरिणोः / हर्योः | हरीणाम् |
| सप्तमी | हरिणि / हरौ | हरिणोः / हर्योः | हरिषु |
| सम्बोधन | हे हरि / हे हरे | हे हरिणी | हे हरीणि |
ⓘ नियमित शब्दों के रूप प्रतिमान से स्वतः बनते हैं (शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com); सर्वनाम, संख्या व अनियमित शब्दों (पति, सखि, पथिन्, पुंस् आदि) की तालिकाएँ हाथ से जाँची गयी हैं। अर्थ — आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश; पर्याय — अमरकोश। धातुओं के रूप हेतु धातु-रूपावली, किसी श्लोक के विश्लेषण हेतु श्लोकार्थ-बोधिनी।