किसी भी संस्कृत शब्द के आठों विभक्तियों व तीनों वचनों के रूप — मूल शब्द या कोई भी रूप (जैसे रामेण, मत्याः, तस्य) लिखें
राजा, सरदार, युवराज
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | राट् / राड् | राजौ | राजः |
| द्वितीया | राजम् | राजौ | राजः |
| तृतीया | राजा | राड्भ्याम् | राड्भिः |
| चतुर्थी | राजे | राड्भ्याम् | राड्भ्यः |
| पञ्चमी | राजः | राड्भ्याम् | राड्भ्यः |
| षष्ठी | राजः | राजोः | राजाम् |
| सप्तमी | राजि | राजोः | राट्त्सु / राट्सु |
| सम्बोधन | हे राट् / हे राड् | हे राजौ | हे राजः |
ⓘ नियमित शब्दों के रूप प्रतिमान से स्वतः बनते हैं (शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com); सर्वनाम, संख्या व अनियमित शब्दों (पति, सखि, पथिन्, पुंस् आदि) की तालिकाएँ हाथ से जाँची गयी हैं। अर्थ — आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश; पर्याय — अमरकोश। धातुओं के रूप हेतु धातु-रूपावली, किसी श्लोक के विश्लेषण हेतु श्लोकार्थ-बोधिनी।