किसी भी संस्कृत शब्द के आठों विभक्तियों व तीनों वचनों के रूप — मूल शब्द या कोई भी रूप (जैसे रामेण, मत्याः, तस्य) लिखें
मित्र (इकारान्त पुंलिङ्ग — विशेष)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सखा | सखायौ | सखायः |
| द्वितीया | सखायम् | सखायौ | सखीन् |
| तृतीया | सख्या | सखिभ्याम् | सखिभिः |
| चतुर्थी | सख्ये | सखिभ्याम् | सखिभ्यः |
| पञ्चमी | सख्युः | सखिभ्याम् | सखिभ्यः |
| षष्ठी | सख्युः | सख्योः | सखीनाम् |
| सप्तमी | सख्यौ | सख्योः | सखिषु |
| सम्बोधन | हे सखे | हे सखायौ | हे सखायः |
ⓘ नियमित शब्दों के रूप प्रतिमान से स्वतः बनते हैं (शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com); सर्वनाम, संख्या व अनियमित शब्दों (पति, सखि, पथिन्, पुंस् आदि) की तालिकाएँ हाथ से जाँची गयी हैं। अर्थ — आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश; पर्याय — अमरकोश। धातुओं के रूप हेतु धातु-रूपावली, किसी श्लोक के विश्लेषण हेतु श्लोकार्थ-बोधिनी।