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📗 शब्द-रूपावली

किसी भी संस्कृत शब्द के आठों विभक्तियों व तीनों वचनों के रूप — मूल शब्द या कोई भी रूप (जैसे रामेण, मत्याः, तस्य) लिखें

लिङ्ग:

मधु (पुंलिङ्ग)

मधुर, सुखद, रुचिकर, आनन्दयुक्त

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमामधुःमधूमधवः
द्वितीयामधुम्मधूमधून्
तृतीयामधुनामधुभ्याम्मधुभिः
चतुर्थीमधवेमधुभ्याम्मधुभ्यः
पञ्चमीमधोःमधुभ्याम्मधुभ्यः
षष्ठीमधोःमध्वोःमधूनाम्
सप्तमीमधौमध्वोःमधुषु
सम्बोधनहे मधोहे मधूहे मधवः

अर्थ: मधुर, सुखद, रुचिकर, आनन्दयुक्त
संस्कृत: पर्याय: चैत्र, चैत्रिक

📚 अमरकोश में:
• शहद (२.९.१०७) — पर्याय: क्षौद्र, माक्षिक
• चैत्र के (१.४.१७) — पर्याय: चैत्रिक
• महुए के फूलों का आसव (२.१०.४१) — पर्याय: मध्वासव, माधवक, माध्वीक

प्रतिमान-आधारित रूप शब्द के प्रतिमान (paradigm) से स्वतः बने हैं — दुर्लभ/अनियमित शब्दों में किसी व्याकरण-ग्रन्थ से मिलान कर लें।

मधु (स्त्रीलिङ्ग)

मधुर, सुखद, रुचिकर, आनन्दयुक्त

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमामधुःमधूमधवः
द्वितीयामधुम्मधूमधूः
तृतीयामध्वामधुभ्याम्मधुभिः
चतुर्थीमधवे / मध्वैमधुभ्याम्मधुभ्यः
पञ्चमीमधोः / मध्वाःमधुभ्याम्मधुभ्यः
षष्ठीमधोः / मध्वाःमध्वोःमधूनाम्
सप्तमीमधौ / मध्वाम्मध्वोःमधुषु
सम्बोधनहे मधोहे मधूहे मधवः

अर्थ: मधुर, सुखद, रुचिकर, आनन्दयुक्त
संस्कृत: पर्याय: चैत्र, चैत्रिक

📚 अमरकोश में:
• शहद (२.९.१०७) — पर्याय: क्षौद्र, माक्षिक
• चैत्र के (१.४.१७) — पर्याय: चैत्रिक
• महुए के फूलों का आसव (२.१०.४१) — पर्याय: मध्वासव, माधवक, माध्वीक

प्रतिमान-आधारित रूप शब्द के प्रतिमान (paradigm) से स्वतः बने हैं — दुर्लभ/अनियमित शब्दों में किसी व्याकरण-ग्रन्थ से मिलान कर लें।

मधु (नपुंसकलिङ्ग)

मधुर, सुखद, रुचिकर, आनन्दयुक्त

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमामधुमधुनीमधूनि
द्वितीयामधुमधुनीमधूनि
तृतीयामधुनामधुभ्याम्मधुभिः
चतुर्थीमधुनेमधुभ्याम्मधुभ्यः
पञ्चमीमधुनःमधुभ्याम्मधुभ्यः
षष्ठीमधुनःमधुनोःमधूनाम्
सप्तमीमधुनिमधुनोःमधुषु
सम्बोधनहे मधु / हे मधोहे मधुनीहे मधूनि

अर्थ: मधुर, सुखद, रुचिकर, आनन्दयुक्त
संस्कृत: पर्याय: चैत्र, चैत्रिक

📚 अमरकोश में:
• शहद (२.९.१०७) — पर्याय: क्षौद्र, माक्षिक
• चैत्र के (१.४.१७) — पर्याय: चैत्रिक
• महुए के फूलों का आसव (२.१०.४१) — पर्याय: मध्वासव, माधवक, माध्वीक

प्रतिमान-आधारित रूप शब्द के प्रतिमान (paradigm) से स्वतः बने हैं — दुर्लभ/अनियमित शब्दों में किसी व्याकरण-ग्रन्थ से मिलान कर लें।

अकारान्त पुंलिङ्ग

आकारान्त स्त्रीलिङ्ग

इकारान्त

ईकारान्त / ऊकारान्त

उकारान्त

ऋकारान्त / ओकारान्त

अकारान्त नपुंसकलिङ्ग

हलन्त (व्यञ्जनान्त)

सर्वनाम

संख्यावाचक

ⓘ नियमित शब्दों के रूप प्रतिमान से स्वतः बनते हैं (शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com); सर्वनाम, संख्या व अनियमित शब्दों (पति, सखि, पथिन्, पुंस् आदि) की तालिकाएँ हाथ से जाँची गयी हैं। अर्थ — आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश; पर्याय — अमरकोश। धातुओं के रूप हेतु धातु-रूपावली, किसी श्लोक के विश्लेषण हेतु श्लोकार्थ-बोधिनी।

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