॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: मधुर, सुखद, रुचिकर, आनन्दयुक्त
संस्कृत: चैत्रमासः, पुष्पमधुः, सुरा · पर्याय: चैत्र, चैत्रिक
व्युत्पत्ति: मन्यत इति मधु, मन्+उ नस्य धः (कृदन्त)
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | मधुः | मधू | मधवः |
| द्वितीया | मधुम् | मधू | मधून् |
| तृतीया | मधुना | मधुभ्याम् | मधुभिः |
| चतुर्थी | मधवे | मधुभ्याम् | मधुभ्यः |
| पञ्चमी | मधोः | मधुभ्याम् | मधुभ्यः |
| षष्ठी | मधोः | मध्वोः | मधूनाम् |
| सप्तमी | मधौ | मध्वोः | मधुषु |
| सम्बोधन | हे मधो | हे मधू | हे मधवः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| मधुः | मधु (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: मधु (स्त्री.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन | मधुस् (नपुं.) — सम्बोधन, एकवचन |
मधुः ➤ मधुर, सुखद, रुचिकर, आनन्दयुक्त
संस्कृत: चैत्रमासः, पुष्पमधुः, सुरा · पर्याय: चैत्र, चैत्रिक
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| मधु |
शहद (२.९.१०७) — क्षौद्र, माक्षिक चैत्र के (१.४.१७) — चैत्रिक |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.० सेकण्ड