॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: अन्धा होना, दिखाई न देना, आँखे मूंदना
संस्कृत: दृष्ट्युपघाते
अंग्रेज़ी: to be blind, to lose vision
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अन्धयति | अन्धयतः | अन्धयन्ति |
| मध्यम | अन्धयसि | अन्धयथः | अन्धयथ |
| उत्तम | अन्धयामि | अन्धयावः | अन्धयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: अन्धयति · लट् (आत्मने.): अन्धयते · लिट्: अन्धयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): अन्धयाञ्चक्रे · लुट्: अन्धयिता · लुट् (आत्मने.): अन्धयिता · लृट्: अन्धयिष्यति · लृट् (आत्मने.): अन्धयिष्यते · लोट्: अन्धयतात् · लोट् (आत्मने.): अन्धयताम् · लङ्: आन्धयत् · लङ् (आत्मने.): आन्धयत · विधिलिङ्: अन्धयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): अन्धयेत · आशीर्लिङ्: अन्ध्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): अन्धयिषीष्ट · लुङ्: आन्दधत् · लुङ् (आत्मने.): आन्दधत · लृङ्: आन्धयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): आन्धयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: अन्धन · ण्वुल्: अन्धकः · तृच्: अन्धयिता · यत्: अन्ध्यः · तव्य: अन्धयितव्यः · अनीयर्: अन्धनीयः · क्त: अन्धितः · क्तवतु: अन्धितवान् · शतृ: अन्धयन् · स्य-शतृ: अन्धयिष्यन् · शानच्: अन्धयमानः · क्त्वा: अन्धयित्वा · ल्यप्: प्रान्ध्य · तुमुन्: अन्धयितुम् · णमुल्: अन्धम् · क्तिन्: अन्धि · क्वसु: अन्धयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| अन्धयति | अन्ध धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: अन्ध धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | अन्धयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: अन्ध + शतृ |
अन्धयति ➤ अन्धा होना, दिखाई न देना, आँखे मूंदना
संस्कृत: दृष्ट्युपघाते
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड