॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: जाना,चलना,फिरना
संस्कृत: शुभावहविधिः
व्युत्पत्ति: इ+अच् (कृदन्त)
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | अयः | अयौ | अयाः |
| द्वितीया | अयम् | अयौ | अयान् |
| तृतीया | अयेन | अयाभ्याम् | अयैः |
| चतुर्थी | अयाय | अयाभ्याम् | अयेभ्यः |
| पञ्चमी | अयात् / अयाद् | अयाभ्याम् | अयेभ्यः |
| षष्ठी | अयस्य | अययोः | अयानाम् |
| सप्तमी | अये | अययोः | अयेषु |
| सम्बोधन | हे अय | हे अयौ | हे अयाः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| अयम् | अय (पुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन (व्युत्पत्ति: ई + अच्) अन्य सम्भावना: इदम् (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन | अय (नपुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: अय् + अच् |
अयम् ➤ जाना,चलना,फिरना
संस्कृत: शुभावहविधिः
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| अय |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड