॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: प्रशंसा करना, स्तुति करना, गरम करना
संस्कृत: स्तवने
अंग्रेज़ी: to praise,to heat
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अर्कयति | अर्कयतः | अर्कयन्ति |
| मध्यम | अर्कयसि | अर्कयथः | अर्कयथ |
| उत्तम | अर्कयामि | अर्कयावः | अर्कयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: अर्कयति · लट् (आत्मने.): अर्कयते · लिट्: अर्कयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): अर्कयाञ्चक्रे · लुट्: अर्कयिता · लुट् (आत्मने.): अर्कयिता · लृट्: अर्कयिष्यति · लृट् (आत्मने.): अर्कयिष्यते · लोट्: अर्कयतात् · लोट् (आत्मने.): अर्कयताम् · लङ्: आर्कयत् · लङ् (आत्मने.): आर्कयत · विधिलिङ्: अर्कयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): अर्कयेत · आशीर्लिङ्: अर्क्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): अर्कयिषीष्ट · लुङ्: आर्चिकत् · लुङ् (आत्मने.): आर्चिकत · लृङ्: आर्कयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): आर्कयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: अर्कण · ण्वुल्: अर्ककः · तृच्: अर्कयिता · यत्: अर्क्यः · तव्य: अर्कयितव्यः · अनीयर्: अर्कणीयः · क्त: अर्कितः · क्तवतु: अर्कितवान् · शतृ: अर्कयन् · स्य-शतृ: अर्कयिष्यन् · शानच्: अर्कयमाणः · क्त्वा: अर्कयित्वा · ल्यप्: प्रार्क्य · तुमुन्: अर्कयितुम् · णमुल्: अर्कम् · क्तिन्: अर्क्ति · क्वसु: अर्कयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| अर्कयति | अर्क् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: अर्क् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | अर्कयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: अर्क् + शतृ |
अर्कयति ➤ प्रशंसा करना, स्तुति करना, गरम करना
संस्कृत: स्तवने
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड