॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: पूजा करना, अर्चना करना
संस्कृत: पूजायाम्
अंग्रेज़ी: to pray, to worship
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | अर्चति / अर्चयति | अर्चतः / अर्चयतः | अर्चन्ति / अर्चयन्ति |
| मध्यम | अर्चयसि / अर्चसि | अर्चथः / अर्चयथः | अर्चथ / अर्चयथ |
| उत्तम | अर्चयामि / अर्चामि | अर्चयावः / अर्चावः | अर्चयामः / अर्चामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: अर्चति · लट् (आत्मने.): अर्चयते · लिट्: अर्चयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): अर्चयाञ्चक्रे · लुट्: अर्चयिता · लुट् (आत्मने.): अर्चयिता · लृट्: अर्चयिष्यति · लृट् (आत्मने.): अर्चयिष्यते · लोट्: अर्चतात् · लोट् (आत्मने.): अर्चयताम् · लङ्: आर्चत् · लङ् (आत्मने.): आर्चयत · विधिलिङ्: अर्चयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): अर्चयेत · आशीर्लिङ्: अर्च्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): अर्चयिषीष्ट · लुङ्: आर्चिचत् · लुङ् (आत्मने.): आर्चिचत · लृङ्: आर्चयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): आर्चयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: अर्चन · ण्वुल्: अर्चकः · तृच्: अर्चिता · यत्: अर्च्यः · ण्यत्: अर्च्यः · तव्य: अर्चितव्यः · अनीयर्: अर्चनीयः · क्त: अर्चितः · क्तवतु: अर्चितवान् · शतृ: अर्चन् · स्य-शतृ: अर्चिष्यन् · शानच्: अर्चयमानः · क्त्वा: अर्चित्वा · ल्यप्: प्रार्च्य · तुमुन्: अर्चितुम् · णमुल्: अर्चम् · घञ्: अर्कः · क्तिन्: अर्क्ति · क्वसु: आनर्चिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| अर्चति | अर्च् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: अर्च् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन | अर्चत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: अर्च् + शतृ |
अर्चति ➤ पूजा करना, अर्चना करना
संस्कृत: पूजायाम्
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड