🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 06:17:55 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

आह

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

आह

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

आह

अर्थ: फैलना, विस्तृत होना

संस्कृत: व्याप्तौ

अंग्रेज़ी: to pervade, to expand, to spread

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. अह् धातु (स्वादिगण, परस्मैपद) — लिट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
  2. ब्रू धातु (अदादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
  3. अव्ययम्
  4. अह् धातु (स्वादिगण, परस्मैपद) — लिट् लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन
  5. आह (पुं.) — सम्बोधन, एकवचन · कृदन्त: अह् + घञ्
  6. अह् धातु (स्वादिगण, परस्मैपद) — लिट् लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — अह् (स्वादिगण) · अर्थ: फैलना, विस्तृत होना (व्याप्तौ)

लिट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमआहआहतुःआहुः
मध्यमआहिथआहथुःआह
उत्तमआहआहिवआहिम

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: अह्नोति · लिट्: आह · लुट्: अहिता · लृट्: अहिष्यति · लोट्: अह्नुतात् · लङ्: आह्नोत् · विधिलिङ्: अह्नुयात् · आशीर्लिङ्: अह्यात् · लुङ्: आहीत् · लृङ्: आहिष्यत्

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: अहन · ण्वुल्: आहकः · तृच्: अहिता · ण्यत्: आह्यः · तव्य: अहितव्यः · अनीयर्: अहनीयः · क्त: अहितः · क्तवतु: अहितवान् · शतृ: अह्नुवन् · स्य-शतृ: अहिष्यन् · क्त्वा: अहित्वा · ल्यप्: प्राह्य · तुमुन्: अहितुम् · णमुल्: आहम् · घञ्: आहः · क्तिन्: आढि · क्वसु: आहिवान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
आहअह् धातु (स्वादिगण, परस्मैपद) — लिट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन
अन्य सम्भावना: ब्रू धातु (अदादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन | अव्ययम्

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

आह ➤ फैलना, विस्तृत होना
संस्कृत: व्याप्तौ

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
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