॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: अमानवीय पराक्रम होना,ईश्वरी शक्ति होना, ऐश्वर्य युक्त होना
संस्कृत: परमैश्वर्ये
अंग्रेज़ी: to be powerful, to be gifted, to have divine power
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | इन्दति | इन्दतः | इन्दन्ति |
| मध्यम | इन्दसि | इन्दथः | इन्दथ |
| उत्तम | इन्दामि | इन्दावः | इन्दामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: इन्दति · लिट्: इन्दाञ्चकार · लुट्: इन्दिता · लृट्: इन्दिष्यति · लोट्: इन्दतात् · लङ्: ऐन्दत् · विधिलिङ्: इन्देत् · आशीर्लिङ्: इन्द्यात् · लुङ्: ऐन्दीत् · लृङ्: ऐन्दिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: इन्दन · ण्वुल्: इन्दकः · तृच्: इन्दिता · ण्यत्: इन्द्यः · तव्य: इन्दितव्यः · अनीयर्: इन्दनीयः · क्त: इन्दितः · क्तवतु: इन्दितवान् · शतृ: इन्दन् · स्य-शतृ: इन्दिष्यन् · क्त्वा: इन्दित्वा · ल्यप्: प्रेन्द्य · तुमुन्: इन्दितुम् · णमुल्: इन्दम् · घञ्: इन्दः · क्तिन्: इन्ति · क्वसु: इन्दाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| इन्दति | इन्द् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: इन्दत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: इन्द् + शतृ | इन्दता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: इन्द् + घञ् · तद्धित: इन्द + तल् (भाववाचक) |
इन्दति ➤ अमानवीय पराक्रम होना,ईश्वरी शक्ति होना, ऐश्वर्य युक्त होना
संस्कृत: परमैश्वर्ये
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड