॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: व्याप्त होना
संस्कृत: व्याप्तौ
अंग्रेज़ी: to pervade,to occupy
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | इन्वति | इन्वतः | इन्वन्ति |
| मध्यम | इन्वसि | इन्वथः | इन्वथ |
| उत्तम | इन्वामि | इन्वावः | इन्वामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: इन्वति · लिट्: इन्वाञ्चकार · लुट्: इन्विता · लृट्: इन्विष्यति · लोट्: इन्वतात् · लङ्: ऐन्वत् · विधिलिङ्: इन्वेत् · आशीर्लिङ्: इन्व्यात् · लुङ्: ऐन्वीत् · लृङ्: ऐन्विष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: इन्वन · ण्वुल्: इन्वकः · तृच्: इन्विता · ण्यत्: इन्व्यः · तव्य: इन्वितव्यः · अनीयर्: इन्वनीयः · क्त: इन्वितः · क्तवतु: इन्वितवान् · शतृ: इन्वन् · स्य-शतृ: इन्विष्यन् · क्त्वा: इन्वित्वा · ल्यप्: प्रेन्व्य · तुमुन्: इन्वितुम् · णमुल्: इन्वम् · घञ्: इन्वः · क्तिन्: इनूति · क्वसु: इन्वाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| इन्वति | इन्व् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: इन्वता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: इन्व + तल् (भाववाचक) | इन्वत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: इन्व् + शतृ |
इन्वति ➤ व्याप्त होना
संस्कृत: व्याप्तौ
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड