॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: शक्तिमान होण ,पराक्रमी होना, जीना, जिलाना
संस्कृत: बलप्राणनयोः
अंग्रेज़ी: to be strong,to live with energy, to win
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | ऊर्जयति | ऊर्जयतः | ऊर्जयन्ति |
| मध्यम | ऊर्जयसि | ऊर्जयथः | ऊर्जयथ |
| उत्तम | ऊर्जयामि | ऊर्जयावः | ऊर्जयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: ऊर्जयति · लट् (आत्मने.): ऊर्जयते · लिट्: ऊर्जयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): ऊर्जयाञ्चक्रे · लुट्: ऊर्जयिता · लुट् (आत्मने.): ऊर्जयिता · लृट्: ऊर्जयिष्यति · लृट् (आत्मने.): ऊर्जयिष्यते · लोट्: ऊर्जयतात् · लोट् (आत्मने.): ऊर्जयताम् · लङ्: और्जयत् · लङ् (आत्मने.): और्जयत · विधिलिङ्: ऊर्जयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): ऊर्जयेत · आशीर्लिङ्: ऊर्ज्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): ऊर्जयिषीष्ट · लुङ्: और्जिजत् · लुङ् (आत्मने.): और्जिजत · लृङ्: और्जयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): और्जयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: ऊर्जन · ण्वुल्: ऊर्जकः · तृच्: ऊर्जयिता · यत्: ऊर्ज्यः · तव्य: ऊर्जयितव्यः · अनीयर्: ऊर्जनीयः · क्त: ऊर्जितः · क्तवतु: ऊर्जितवान् · शतृ: ऊर्जयन् · स्य-शतृ: ऊर्जयिष्यन् · शानच्: ऊर्जयमानः · क्त्वा: ऊर्जयित्वा · ल्यप्: प्रोर्ज्य · तुमुन्: ऊर्जयितुम् · णमुल्: ऊर्जम् · क्तिन्: ऊर्क्ति · क्वसु: ऊर्जयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| ऊर्जयति | ऊर्ज् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: ऊर्ज् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | ऊर्जयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: ऊर्ज् + शतृ |
ऊर्जयति ➤ शक्तिमान होण ,पराक्रमी होना, जीना, जिलाना
संस्कृत: बलप्राणनयोः
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड