॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: स्तुति करना, प्रार्थना करना
संस्कृत: स्तुतौ दीप्तौ च
अंग्रेज़ी: to praise, to pray, to glow, to shine
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | ऋचति | ऋचतः | ऋचन्ति |
| मध्यम | ऋचसि | ऋचथः | ऋचथ |
| उत्तम | ऋचामि | ऋचावः | ऋचामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: ऋचति · लिट्: आनर्च · लुट्: अर्चिता · लृट्: अर्चिष्यति · लोट्: ऋचतात् · लङ्: आर्चत् · विधिलिङ्: ऋचेत् · आशीर्लिङ्: ऋच्यात् · लुङ्: आर्चीत् · लृङ्: आर्चिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: अर्चन · ण्वुल्: अर्चकः · तृच्: अर्चिता · ण्यत्: अर्च्यः · तव्य: अर्चितव्यः · अनीयर्: अर्चनीयः · क्त: ऋचितः · क्तवतु: ऋचितवान् · शतृ: ऋचन् · स्य-शतृ: अर्चिष्यन् · क्त्वा: अर्चित्वा · ल्यप्: प्रार्च्य · तुमुन्: अर्चितुम् · णमुल्: अर्चम् · घञ्: अर्कः · क्तिन्: ऋक्ति · क्वसु: आनृचिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| ऋचति | ऋच् धातु (तुदादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: ऋचत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: ऋच् + शतृ | ऋचत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: ऋच् + शतृ |
ऋचति ➤ स्तुति करना, प्रार्थना करना
संस्कृत: स्तुतौ दीप्तौ च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड