॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: क्या
संस्कृत: प्रश्नवाचकं सर्वनाम · पर्याय: अर्तन, ऋतीया, हृणीया, घृणा
अंग्रेज़ी: What
व्युत्पत्ति: कि+डिमु
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | कः | कौ | के |
| द्वितीया | कम् | कौ | कान् |
| तृतीया | केन | काभ्याम् | कैः |
| चतुर्थी | कस्मै | काभ्याम् | केभ्यः |
| पञ्चमी | कस्मात् / कस्माद् | काभ्याम् | केभ्यः |
| षष्ठी | कस्य | कयोः | केषाम् |
| सप्तमी | कस्मिन् | कयोः | केषु |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| कः | किम् (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन अन्य सम्भावना: का (पुं.) — पञ्चमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: कै + अच् | का (पुं.) — षष्ठी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: कै + अच् |
कः ➤ क्या
संस्कृत: प्रश्नवाचकं सर्वनाम · पर्याय: अर्तन, ऋतीया, हृणीया, घृणा
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| किम् |
'किम्' — प्रश्न, निन्दा ('किं राजा यो न रक्षति'?) (३.३.२६६) — किं, राजा, यो, रक्षति विकल्प (या/अथवा) (३.४.५) — आहो, उताहो, किमुत, किमु, उत |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड