॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: दुःख या आनन्द में लीन होना, नशा में बेसुध होना
संस्कृत: मदे
अंग्रेज़ी: to be intoxicated, to be drunk, to be confused
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कण्डते | कण्डेते | कण्डन्ते |
| मध्यम | कण्डसे | कण्डेथे | कण्डध्वे |
| उत्तम | कण्डे | कण्डावहे | कण्डामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): कण्डते · लिट् (आत्मने.): चकण्डे · लुट् (आत्मने.): कण्डिता · लृट् (आत्मने.): कण्डिष्यते · लोट् (आत्मने.): कण्डताम् · लङ् (आत्मने.): अकण्डत · विधिलिङ् (आत्मने.): कण्डेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): कण्डिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अकण्डिष्ट · लृङ् (आत्मने.): अकण्डिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: कण्डन · ण्वुल्: कण्डकः · तृच्: कण्डिता · ण्यत्: कण्ड्यः · तव्य: कण्डितव्यः · अनीयर्: कण्डनीयः · क्त: कण्डितः · क्तवतु: कण्डितवान् · शानच्: कण्डमानः · क्त्वा: कण्डित्वा · ल्यप्: प्रकण्ड्य · तुमुन्: कण्डितुम् · णमुल्: कण्डम् · घञ्: कण्डः · क्तिन्: कण्टि · क्वसु: चकण्ड्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| कण्डते | कण्ड् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: कण्डता (स्त्री.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: कण्ड + तल् (भाववाचक) | कण्डत् (नपुं.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: कण्ड् + शतृ |
कण्डते ➤ दुःख या आनन्द में लीन होना, नशा में बेसुध होना
संस्कृत: मदे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड