॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: दुर्बल होना
संस्कृत: दौर्बल्ये
अंग्रेज़ी: to be weak
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कृपयति | कृपयतः | कृपयन्ति |
| मध्यम | कृपयसि | कृपयथः | कृपयथ |
| उत्तम | कृपयामि | कृपयावः | कृपयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: कृपयति · लट् (आत्मने.): कृपयते · लिट्: कृपयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): कृपयाञ्चक्रे · लुट्: कृपयिता · लुट् (आत्मने.): कृपयिता · लृट्: कृपयिष्यति · लृट् (आत्मने.): कृपयिष्यते · लोट्: कृपयतात् · लोट् (आत्मने.): कृपयताम् · लङ्: अकृपयत् · लङ् (आत्मने.): अकृपयत · विधिलिङ्: कृपयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): कृपयेत · आशीर्लिङ्: कृप्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): कृपयिषीष्ट · लुङ्: अचकृपत् · लुङ् (आत्मने.): अचकृपत · लृङ्: अकृपयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अकृपयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: कृपण · ण्वुल्: कृपकः · तृच्: कृपयिता · यत्: कृप्यः · तव्य: कृपयितव्यः · अनीयर्: कृपणीयः · क्त: कृपितः · क्तवतु: कृपितवान् · शतृ: कृपयन् · स्य-शतृ: कृपयिष्यन् · शानच्: कृपयमाणः · क्त्वा: कृपयित्वा · ल्यप्: प्रकृपय्य · तुमुन्: कृपयितुम् · णमुल्: कृपम् · क्तिन्: कृप्ति · क्वसु: कृपयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| कृपयति | कृप धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: कृप धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | कृपयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: कृप + शतृ |
कृपयति ➤ दुर्बल होना
संस्कृत: दौर्बल्ये
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड