॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: कृश होना, पतला होना
संस्कृत: तनूकरणे
अंग्रेज़ी: to be thin
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कृश्यति | कृश्यतः | कृश्यन्ति |
| मध्यम | कृश्यसि | कृश्यथः | कृश्यथ |
| उत्तम | कृश्यामि | कृश्यावः | कृश्यामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: कृश्यति · लिट्: चकर्श · लुट्: कर्शिता · लृट्: कर्शिष्यति · लोट्: कृश्यतात् · लङ्: अकृश्यत् · विधिलिङ्: कृश्येत् · आशीर्लिङ्: कृश्यात् · लुङ्: अकृशत् · लृङ्: अकर्शिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: कर्शन · ण्वुल्: कर्शकः · तृच्: कर्शिता · तव्य: कर्शितव्यः · अनीयर्: कर्शनीयः · क्त: कृशः · क्तवतु: कृश · शतृ: कृश्यन् · स्य-शतृ: कर्शिष्यन् · क्त्वा: कृशित्वा · ल्यप्: प्रकृश्य · तुमुन्: कर्शितुम् · णमुल्: कर्शम् · घञ्: कर्शः · क्तिन्: कृष्टि · क्वसु: चकृश्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| कृश्यति | कृश् धातु (दिवादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: कृश्यत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: कृश् + शतृ | कृश्यता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: कृश् + क्यप् · तद्धित: कृश्य + तल् (भाववाचक) |
कृश्यति ➤ कृश होना, पतला होना
संस्कृत: तनूकरणे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड