॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: बोलना, क्रोध करना
संस्कृत: भाषायाम्
अंग्रेज़ी: to speak, to talk, to be angry
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कोपति / कोपयति | कोपतः / कोपयतः | कोपन्ति / कोपयन्ति |
| मध्यम | कोपयसि / कोपसि | कोपथः / कोपयथः | कोपथ / कोपयथ |
| उत्तम | कोपयामि / कोपामि | कोपयावः / कोपावः | कोपयामः / कोपामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: कोपति · लट् (आत्मने.): कोपयते · लिट्: कोपयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): कोपयाञ्चक्रे · लुट्: कोपयिता · लुट् (आत्मने.): कोपयिता · लृट्: कोपयिष्यति · लृट् (आत्मने.): कोपयिष्यते · लोट्: कोपतात् · लोट् (आत्मने.): कोपयताम् · लङ्: अकोपत् · लङ् (आत्मने.): अकोपयत · विधिलिङ्: कोपयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): कोपयेत · आशीर्लिङ्: कुप्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): कोपयिषीष्ट · लुङ्: अकोपीत् · लुङ् (आत्मने.): अचूकुपत · लृङ्: अकोपयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अकोपयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: कोपन · ण्वुल्: कोपकः · तृच्: कोपिता · यत्: कोप्यः · ण्यत्: कोप्यः · तव्य: कोपितव्यः · अनीयर्: कोपनीयः · क्त: कुपितः · क्तवतु: कुपितवान् · शतृ: कोपन् · स्य-शतृ: कोपिष्यन् · शानच्: कोपयमानः · क्त्वा: कुपित्वा · ल्यप्: प्रकुप्य · तुमुन्: कोपितुम् · णमुल्: कोपम् · घञ्: कोपः · क्तिन्: कुप्ति · क्वसु: चुकुप्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| कोपति | कुप् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: कोपता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: कोप + तल् (भाववाचक) | कोपत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: कुप् + शतृ |
कोपति ➤ बोलना, क्रोध करना
संस्कृत: भाषायाम्
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड