॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: बटोरना, अपने के समान वर्तना, सजातीयता से रहना
संस्कृत: संस्त्याने बन्धुषु च
अंग्रेज़ी: to collect, to gather, to treat equally, to treat like family
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | कोलति | कोलतः | कोलन्ति |
| मध्यम | कोलसि | कोलथः | कोलथ |
| उत्तम | कोलामि | कोलावः | कोलामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: कोलति · लिट्: चुकोल · लुट्: कोलिता · लृट्: कोलिष्यति · लोट्: कोलतात् · लङ्: अकोलत् · विधिलिङ्: कोलेत् · आशीर्लिङ्: कुल्यात् · लुङ्: अकोलीत् · लृङ्: अकोलिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: कोलन · ण्वुल्: कोलकः · तृच्: कोलिता · ण्यत्: कोल्यः · तव्य: कोलितव्यः · अनीयर्: कोलनीयः · क्त: कुलितः · क्तवतु: कुलितवान् · शतृ: कोलन् · स्य-शतृ: कोलिष्यन् · क्त्वा: कुलित्वा · ल्यप्: प्रकुल्य · तुमुन्: कोलितुम् · णमुल्: कोलम् · घञ्: कोलः · क्तिन्: कुल्ति · क्वसु: चुकुल्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| कोलति | कुल् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: कोलत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: कुल् + शतृ | कोलत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: कुल् + शतृ |
कोलति ➤ बटोरना, अपने के समान वर्तना, सजातीयता से रहना
संस्कृत: संस्त्याने बन्धुषु च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड