॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: हिन्दी अर्थ उपलब्ध नहीं
संस्कृत: शब्दे
अंग्रेज़ी: to sound
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | खवते | खवेते | खवन्ते |
| मध्यम | खवसे | खवेथे | खवध्वे |
| उत्तम | खवे | खवावहे | खवामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): खवते · लिट् (आत्मने.): चुखुवे · लुट् (आत्मने.): खोता · लृट् (आत्मने.): खोष्यते · लोट् (आत्मने.): खवताम् · लङ् (आत्मने.): अखवत · विधिलिङ् (आत्मने.): खवेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): खोषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अखोष्ट · लृङ् (आत्मने.): अखोष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: खवन · ण्वुल्: खावकः · तृच्: खोता · यत्: खव्यः · ण्यत्: खाव्यः · तव्य: खोतव्यः · अनीयर्: खवनीयः · क्त: खुतः · क्तवतु: खुतवान् · शानच्: खवमानः · क्त्वा: खुत्वा · ल्यप्: प्रखुत्य · तुमुन्: खोतुम् · णमुल्: खावम् · क्तिन्: खुति · क्वसु: चुखुवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| खवते | खु धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: खवता (स्त्री.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: खु + अप् · तद्धित: खव + तल् (भाववाचक) | खवता (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन · कृदन्त: खु + अप् · तद्धित: खव + तल् (भाववाचक) |
खवते ➤ to sound (अंग्रेज़ी कोश)
संस्कृत: शब्दे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड