॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: शब्द करना
संस्कृत: शब्दे
अंग्रेज़ी: to sound
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | गञ्जति | गञ्जतः | गञ्जन्ति |
| मध्यम | गञ्जसि | गञ्जथः | गञ्जथ |
| उत्तम | गञ्जामि | गञ्जावः | गञ्जामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: गञ्जति · लिट्: जगञ्ज · लुट्: गञ्जिता · लृट्: गञ्जिष्यति · लोट्: गञ्जतात् · लङ्: अगञ्जत् · विधिलिङ्: गञ्जेत् · आशीर्लिङ्: गञ्ज्यात् · लुङ्: अगञ्जीत् · लृङ्: अगञ्जिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: गञ्जन · ण्वुल्: गञ्जकः · तृच्: गञ्जिता · ण्यत्: गञ्ज्यः · तव्य: गञ्जितव्यः · अनीयर्: गञ्जनीयः · क्त: गञ्जितः · क्तवतु: गञ्जितवान् · शतृ: गञ्जन् · स्य-शतृ: गञ्जिष्यन् · क्त्वा: गञ्जित्वा · ल्यप्: प्रगज्य · तुमुन्: गञ्जितुम् · णमुल्: गञ्जम् · घञ्: गञ्जः · क्तिन्: गङ्क्ति · क्वसु: जगञ्ज्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| गञ्जति | गञ्ज् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: गञ्जता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: गञ्ज + तल् (भाववाचक) | गञ्जत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: गञ्ज् + शतृ |
गञ्जति ➤ शब्द करना
संस्कृत: शब्दे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड