॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: व्याकुल होना
संस्कृत: व्याकुलत्वे
अंग्रेज़ी: to be confused, to be disturbed,to be distressed
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | गुप्यति | गुप्यतः | गुप्यन्ति |
| मध्यम | गुप्यसि | गुप्यथः | गुप्यथ |
| उत्तम | गुप्यामि | गुप्यावः | गुप्यामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: गुप्यति · लिट्: जुगोप · लुट्: गोपिता · लृट्: गोपिष्यति · लोट्: गुप्यतात् · लङ्: अगुप्यत् · विधिलिङ्: गुप्येत् · आशीर्लिङ्: गुप्यात् · लुङ्: अगुपत् · लृङ्: अगोपिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: गोपन · ण्वुल्: गोपकः · तृच्: गोपिता · ण्यत्: गोप्यः · तव्य: गोपितव्यः · अनीयर्: गोपनीयः · क्त: गुपितः · क्तवतु: गुपितवान् · शतृ: गुप्यन् · स्य-शतृ: गोपिष्यन् · क्त्वा: गुपित्वा · ल्यप्: प्रगुप्य · तुमुन्: गोपितुम् · णमुल्: गोपम् · घञ्: गोपः · क्तिन्: गुप्ति · क्वसु: जुगुप्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| गुप्यति | गुप् धातु (दिवादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: गुप्यत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: गुप् + शतृ | गुप्यत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: गुप् + शतृ |
गुप्यति ➤ व्याकुल होना
संस्कृत: व्याकुलत्वे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड