🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 08:34:53 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

गुरु

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

गुरु

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

गुरु

अर्थ: गृ - कु, उत्वम्

संस्कृत: पर्याय: बृहस्पति, सुराचार्य, गीष्पति, धिषण, जीव

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. गुरु (नपुं.) — सम्बोधन, एकवचन
  2. गुरु (नपुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन
  3. गुरु (नपुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन

📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका

शब्दरूप — गुरु (नपुंसकलिङ्ग)

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमागुरुगुरुणीगुरूणि
द्वितीयागुरुगुरुणीगुरूणि
तृतीयागुरुणागुरुभ्याम्गुरुभिः
चतुर्थीगुरुणेगुरुभ्याम्गुरुभ्यः
पञ्चमीगुरुणःगुरुभ्याम्गुरुभ्यः
षष्ठीगुरुणःगुरुणोःगुरूणाम्
सप्तमीगुरुणिगुरुणोःगुरुषु
सम्बोधनहे गुरु / हे गुरोहे गुरुणीहे गुरूणि

रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
गुरुगुरु (नपुं.) — सम्बोधन, एकवचन
अन्य सम्भावना: गुरु (नपुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन | गुरु (नपुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

गुरु ➤ गृ - कु, उत्वम्
संस्कृत: पर्याय: बृहस्पति, सुराचार्य, गीष्पति, धिषण, जीव

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

शब्दअमरकोश — विषय, पर्याय
गुरु

ⓘ विषय पर क्लिक करें — अमरकोश का वह मूल श्लोक अन्वय, अनुवाद व भावार्थ सहित खुलेगा; शब्द पर क्लिक करें — शब्द-रूपावली।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
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