॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: गच्छत्यनेन, गम् करणे डो तारा .
संस्कृत: वृषभः, गौः, बाणः, इन्द्रस्य वज्रायुधम्, जलम्, किरणः, नेत्रम्, पशुः, स्वर्गः, वचनम्, दिक् · पर्याय: भू, भूमि, अचला, अनन्ता, रसा
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | गौः | गावौ | गावः |
| द्वितीया | गाम् | गावौ | गाः |
| तृतीया | गवा | गोभ्याम् | गोभिः |
| चतुर्थी | गवे | गोभ्याम् | गोभ्यः |
| पञ्चमी | गोः | गोभ्याम् | गोभ्यः |
| षष्ठी | गोः | गवोः | गवाम् |
| सप्तमी | गवि | गवोः | गोषु |
| सम्बोधन | हे गौः | हे गावौ | हे गावः |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| गौः | गो (पुं.) — सम्बोधन, एकवचन अन्य सम्भावना: गो (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन | गो (पुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन |
गौः ➤ गच्छत्यनेन, गम् करणे डो तारा .
संस्कृत: वृषभः, गौः, बाणः, इन्द्रस्य वज्रायुधम्, जलम्, किरणः, नेत्रम्, पशुः, स्वर्गः, वचनम्, दिक् · पर्याय: भू, भूमि, अचला, अनन्ता, रसा
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| गो |
पृथ्वी के और नाम (२.१.४) — विपुला, गह्वरी, धात्री, इला, कुम्भिनी, क्षमा, भूतधात्री, रत्नगर्भा बैल के और नाम (२.९.६१) — अनड्वान्, सौरभेय |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड