॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: चोरी करना
संस्कृत: स्तेयकरणे
अंग्रेज़ी: to rob,to steal
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | ग्रोचति | ग्रोचतः | ग्रोचन्ति |
| मध्यम | ग्रोचसि | ग्रोचथः | ग्रोचथ |
| उत्तम | ग्रोचामि | ग्रोचावः | ग्रोचामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: ग्रोचति · लिट्: जुग्रोच · लुट्: ग्रोचिता · लृट्: ग्रोचिष्यति · लोट्: ग्रोचतात् · लङ्: अग्रोचत् · विधिलिङ्: ग्रोचेत् · आशीर्लिङ्: ग्रुच्यात् · लुङ्: अग्रुचत् · लृङ्: अग्रोचिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: ग्रोचन · ण्वुल्: ग्रोचकः · तृच्: ग्रोचिता · ण्यत्: ग्रोच्यः · तव्य: ग्रोचितव्यः · अनीयर्: ग्रोचनीयः · क्त: ग्रुक्तः · क्तवतु: ग्रुक्तवान् · शतृ: ग्रोचन् · स्य-शतृ: ग्रोचिष्यन् · क्त्वा: ग्रुक्त्वा · ल्यप्: प्रग्रुच्य · तुमुन्: ग्रोचितुम् · णमुल्: ग्रोचम् · घञ्: ग्रोचः · क्तिन्: ग्रुक्ति · क्वसु: जुग्रुच्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| ग्रोचति | ग्रुच् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: ग्रोचत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: ग्रुच् + शतृ | ग्रोचता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: ग्रुच् + घञ् · तद्धित: ग्रोच + तल् (भाववाचक) |
ग्रोचति ➤ चोरी करना
संस्कृत: स्तेयकरणे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड