॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: बूँद बूँद गिरना, चूना, टपकना
संस्कृत: प्रस्रवणे
अंग्रेज़ी: to sprinkle,to drip, to ooze
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | घारयति | घारयतः | घारयन्ति |
| मध्यम | घारयसि | घारयथः | घारयथ |
| उत्तम | घारयामि | घारयावः | घारयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: घारयति · लट् (आत्मने.): घारयते · लिट्: घारयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): घारयाञ्चक्रे · लुट्: घारयिता · लुट् (आत्मने.): घारयिता · लृट्: घारयिष्यति · लृट् (आत्मने.): घारयिष्यते · लोट्: घारयतात् · लोट् (आत्मने.): घारयताम् · लङ्: अघारयत् · लङ् (आत्मने.): अघारयत · विधिलिङ्: घारयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): घारयेत · आशीर्लिङ्: घार्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): घारयिषीष्ट · लुङ्: अजीघरत् · लुङ् (आत्मने.): अजीघरत · लृङ्: अघारयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अघारयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: घारण · ण्वुल्: घारकः · तृच्: घारयिता · यत्: घार्यः · तव्य: घारयितव्यः · अनीयर्: घारणीयः · क्त: घारितः · क्तवतु: घारितवान् · शतृ: घारयन् · स्य-शतृ: घारयिष्यन् · शानच्: घारयमाणः · क्त्वा: घारयित्वा · ल्यप्: प्रघार्य · तुमुन्: घारयितुम् · णमुल्: घारम् · क्तिन्: घार्ति · क्वसु: घारयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| घारयति | घृ धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: घृ धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | घृ धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) |
घारयति ➤ बूँद बूँद गिरना, चूना, टपकना
संस्कृत: प्रस्रवणे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड