॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: दान देना, जाना
संस्कृत: दाने गतौ च
अंग्रेज़ी: to go, to give
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | चणति | चणतः | चणन्ति |
| मध्यम | चणसि | चणथः | चणथ |
| उत्तम | चणामि | चणावः | चणामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: चणति · लिट्: चचाण · लुट्: चणिता · लृट्: चणिष्यति · लोट्: चणतात् · लङ्: अचणत् · विधिलिङ्: चणेत् · आशीर्लिङ्: चण्यात् · लुङ्: अचणीत् · लृङ्: अचणिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: चणन · ण्वुल्: चाणकः · तृच्: चणिता · ण्यत्: चाण्यः · तव्य: चणितव्यः · अनीयर्: चणनीयः · क्त: चणितः · क्तवतु: चणितवान् · शतृ: चणन् · स्य-शतृ: चणिष्यन् · क्त्वा: चणित्वा · ल्यप्: प्रचण्य · तुमुन्: चणितुम् · णमुल्: चाणम् · घञ्: चाणः · क्तिन्: चाण्टि · क्वसु: चेणिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| चणति | चण् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: चणता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: चण + तल् (भाववाचक) | चणत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: चण् + शतृ |
चणति ➤ दान देना, जाना
संस्कृत: दाने गतौ च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड