॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: ढूंढना, बटोरना, एकत्र करना
संस्कृत: चयने
अंग्रेज़ी: to find, to gather, to collect
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | चपयति / चयति / चययति | चपयतः / चयतः / चययतः | चपयन्ति / चयन्ति / चययन्ति |
| मध्यम | चपयसि / चययसि / चयसि | चपयथः / चयथः / चययथः | चपयथ / चयथ / चययथ |
| उत्तम | चपयामि / चययामि / चयामि | चपयावः / चययावः / चयावः | चपयामः / चययामः / चयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: चपयति · लट् (आत्मने.): चपयते · लिट्: चपयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): चपयाञ्चक्रे · लुट्: चपयिता · लुट् (आत्मने.): चपयिता · लृट्: चपयिष्यति · लृट् (आत्मने.): चपयिष्यते · लोट्: चपयतात् · लोट् (आत्मने.): चपयताम् · लङ्: अचपयत् · लङ् (आत्मने.): अचपयत · विधिलिङ्: चपयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): चपयेत · आशीर्लिङ्: चप्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): चपयिषीष्ट · लुङ्: अचायीत् · लुङ् (आत्मने.): अचयिष्ट · लृङ्: अचपयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अचपयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: चयन · ण्वुल्: चायकः · तृच्: चयिता · यत्: चेयः · तव्य: चयितव्यः · अनीयर्: चयनीयः · क्त: चियितः · क्तवतु: चियितवान् · शतृ: चयन् · स्य-शतृ: चयिष्यन् · शानच्: चयमानः · क्त्वा: चयित्वा · ल्यप्: प्रचित्य · तुमुन्: चयितुम् · णमुल्: चायम् · क्तिन्: चिति · क्वसु: चिचिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| चयति | चि धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: चयता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: चय + तल् (भाववाचक) | चयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: चि + शतृ |
चयति ➤ ढूंढना, बटोरना, एकत्र करना
संस्कृत: चयने
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड