॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: जलाना, भस्म करना
संस्कृत: दाहे
अंग्रेज़ी: to burn to ashes
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | चूर्यते | चूर्येते | चूर्यन्ते |
| मध्यम | चूर्यसे | चूर्येथे | चूर्यध्वे |
| उत्तम | चूर्ये | चूर्यावहे | चूर्यामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): चूर्यते · लिट् (आत्मने.): चुचूरे · लुट् (आत्मने.): चूरिता · लृट् (आत्मने.): चूरिष्यते · लोट् (आत्मने.): चूर्यताम् · लङ् (आत्मने.): अचूर्यत · विधिलिङ् (आत्मने.): चूर्येत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): चूरिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अचूरिष्ट · लृङ् (आत्मने.): अचूरिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: चूरण · ण्वुल्: चूरकः · तृच्: चूरिता · ण्यत्: चूर्यः · तव्य: चूरितव्यः · अनीयर्: चूरणीयः · क्त: चूर्णः · क्तवतु: चूर्णवान् · शानच्: चूर्यमाणः · क्त्वा: चूरित्वा · ल्यप्: प्रचूर्य · तुमुन्: चूरितुम् · णमुल्: चूरम् · घञ्: चूरः · क्तिन्: चूर्ति · क्वसु: चुचूर्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| चूर्यते | चूर् धातु (दिवादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: चूर् धातु (दिवादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · कर्मणि/भावे | चूर्यता (स्त्री.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: चूर् + ण्यत् · तद्धित: चूर्य + तल् (भाववाचक) |
चूर्यते ➤ जलाना, भस्म करना
संस्कृत: दाहे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.३ सेकण्ड