॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: बढ़ाना, ऊँचा करना, भिगोना, डुबोना
संस्कृत: समुच्छ्राये
अंग्रेज़ी: to raise,to elevate, to make something sink, to make wet
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | चोलयति | चोलयतः | चोलयन्ति |
| मध्यम | चोलयसि | चोलयथः | चोलयथ |
| उत्तम | चोलयामि | चोलयावः | चोलयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: चोलयति · लट् (आत्मने.): चोलयते · लिट्: चोलयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): चोलयाञ्चक्रे · लुट्: चोलयिता · लुट् (आत्मने.): चोलयिता · लृट्: चोलयिष्यति · लृट् (आत्मने.): चोलयिष्यते · लोट्: चोलयतात् · लोट् (आत्मने.): चोलयताम् · लङ्: अचोलयत् · लङ् (आत्मने.): अचोलयत · विधिलिङ्: चोलयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): चोलयेत · आशीर्लिङ्: चोल्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): चोलयिषीष्ट · लुङ्: अचूचुलत् · लुङ् (आत्मने.): अचूचुलत · लृङ्: अचोलयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अचोलयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: चोलन · ण्वुल्: चोलकः · तृच्: चोलयिता · यत्: चोल्यः · तव्य: चोलयितव्यः · अनीयर्: चोलनीयः · क्त: चोलितः · क्तवतु: चोलितवान् · शतृ: चोलयन् · स्य-शतृ: चोलयिष्यन् · शानच्: चोलयमानः · क्त्वा: चोलयित्वा · ल्यप्: प्रचोल्य · तुमुन्: चोलयितुम् · णमुल्: चोलम् · क्तिन्: चोल्ति · क्वसु: चोलयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| चोलयति | चुल् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: चुल् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | चोलयत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: चुल् + शतृ |
चोलयति ➤ बढ़ाना, ऊँचा करना, भिगोना, डुबोना
संस्कृत: समुच्छ्राये
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.४ सेकण्ड