॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: संसार, लोक, विश्व
संस्कृत: लोकः, चरम्, विश्वम् · पर्याय: जगती, लोक, विष्टप, भुवन
अंग्रेज़ी: World, Universe
व्युत्पत्ति: गम् + क्विप् नि.द्वित्वं तुगागमः हिलने-जुलने
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | जगत् / जगद् | जगती | जगन्ति |
| द्वितीया | जगत् / जगद् | जगती | जगन्ति |
| तृतीया | जगता | जगद्भ्याम् | जगद्भिः |
| चतुर्थी | जगते | जगद्भ्याम् | जगद्भ्यः |
| पञ्चमी | जगतः | जगद्भ्याम् | जगद्भ्यः |
| षष्ठी | जगतः | जगतोः | जगताम् |
| सप्तमी | जगति | जगतोः | जगत्सु |
| सम्बोधन | हे जगत् / हे जगद् | हे जगती | हे जगन्ति |
रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| जगत् | जगत् (नपुं.) — सम्बोधन, एकवचन अन्य सम्भावना: जगत् (नपुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन | जगत् (नपुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन |
जगत् ➤ संसार, लोक, विश्व
संस्कृत: लोकः, चरम्, विश्वम् · पर्याय: जगती, लोक, विष्टप, भुवन
| शब्द | अमरकोश — विषय, पर्याय |
|---|---|
| जगत् |
लोक/संसार के नाम (२.१.७) — जगती, लोक, विष्टप, भुवन |
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इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड