॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: मारना, हिंसा करना
संस्कृत: हिंसायाम्
अंग्रेज़ी: to kill, to destroy, to hurt
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जषति | जषतः | जषन्ति |
| मध्यम | जषसि | जषथः | जषथ |
| उत्तम | जषामि | जषावः | जषामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: जषति · लिट्: जजाष · लुट्: जषिता · लृट्: जषिष्यति · लोट्: जषतात् · लङ्: अजषत् · विधिलिङ्: जषेत् · आशीर्लिङ्: जष्यात् · लुङ्: अजषीत् · लृङ्: अजषिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: जषण · ण्वुल्: जाषकः · तृच्: जषिता · ण्यत्: जाष्यः · तव्य: जषितव्यः · अनीयर्: जषणीयः · क्त: जषितः · क्तवतु: जषितवान् · शतृ: जषन् · स्य-शतृ: जषिष्यन् · क्त्वा: जषित्वा · ल्यप्: प्रजष्य · तुमुन्: जषितुम् · णमुल्: जाषम् · घञ्: जाषः · क्तिन्: जष्टि · क्वसु: जेषिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| जषति | जष् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: जषता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: जष + तल् (भाववाचक) | जषत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: जष् + शतृ |
जषति ➤ मारना, हिंसा करना
संस्कृत: हिंसायाम्
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड