॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: ढांकना, निवारण करना, जाल से ढांकना
संस्कृत: अपवारणे
अंग्रेज़ी: to cover,to hide, to cover by net
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जालयति | जालयतः | जालयन्ति |
| मध्यम | जालयसि | जालयथः | जालयथ |
| उत्तम | जालयामि | जालयावः | जालयामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: जालयति · लट् (आत्मने.): जालयते · लिट्: जालयाञ्चकार · लिट् (आत्मने.): जालयाञ्चक्रे · लुट्: जालयिता · लुट् (आत्मने.): जालयिता · लृट्: जालयिष्यति · लृट् (आत्मने.): जालयिष्यते · लोट्: जालयतात् · लोट् (आत्मने.): जालयताम् · लङ्: अजालयत् · लङ् (आत्मने.): अजालयत · विधिलिङ्: जालयेत् · विधिलिङ् (आत्मने.): जालयेत · आशीर्लिङ्: जाल्यात् · आशीर्लिङ् (आत्मने.): जालयिषीष्ट · लुङ्: अजीजलत् · लुङ् (आत्मने.): अजीजलत · लृङ्: अजालयिष्यत् · लृङ् (आत्मने.): अजालयिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: जालन · ण्वुल्: जालकः · तृच्: जालयिता · यत्: जाल्यः · तव्य: जालयितव्यः · अनीयर्: जालनीयः · क्त: जालितः · क्तवतु: जालितवान् · शतृ: जालयन् · स्य-शतृ: जालयिष्यन् · शानच्: जालयमानः · क्त्वा: जालयित्वा · ल्यप्: प्रजाल्य · तुमुन्: जालयितुम् · णमुल्: जालम् · क्तिन्: जाल्ति · क्वसु: जालयाम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| जालयति | जल् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: जल् धातु (चुरादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) | जल् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन · णिजन्त (प्रेरणार्थक) |
जालयति ➤ ढांकना, निवारण करना, जाल से ढांकना
संस्कृत: अपवारणे
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.४ सेकण्ड