॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: सूंघना
संस्कृत: गन्धोपादाने घ्राणे च
अंग्रेज़ी: to smell
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जिघ्रति | जिघ्रतः | जिघ्रन्ति |
| मध्यम | जिघ्रसि | जिघ्रथः | जिघ्रथ |
| उत्तम | जिघ्रामि | जिघ्रावः | जिघ्रामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: जिघ्रति · लिट्: जघ्रौ · लुट्: घ्राता · लृट्: घ्रास्यति · लोट्: जिघ्रतात् · लङ्: अजिघ्रत् · विधिलिङ्: जिघ्रेत् · आशीर्लिङ्: घ्रायात् · लुङ्: अघ्रात् · लृङ्: अघ्रास्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: घ्राण · ण्वुल्: घ्रायकः · तृच्: घ्राता · यत्: घ्रेयः · तव्य: घ्रातव्यः · अनीयर्: घ्राणीयः · क्त: घ्रातः · क्तवतु: घ्रातवान् · शतृ: जिघ्रन् · स्य-शतृ: घ्रास्यन् · क्त्वा: घ्रात्वा · ल्यप्: प्रघ्राय · तुमुन्: घ्रातुम् · णमुल्: घ्रायम् · घञ्: घ्रायः · क्तिन्: घ्राति · क्वसु: जघ्रिवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| जिघ्रति | घ्रा धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: जिघ्रता (स्त्री.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · तद्धित: जिघ्र + तल् (भाववाचक) | जिघ्रत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: घ्रा + शतृ |
जिघ्रति ➤ सूंघना
संस्कृत: गन्धोपादाने घ्राणे च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड