॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: बचाना, संरक्षण करना, छिपाना, दोष लगाना, निन्दा करना
संस्कृत: गोपने निन्दायां च
अंग्रेज़ी: to protect, to conceal, to hide, to blame, to criticize
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, आत्मनेपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | जुगुप्सते | जुगुप्सेते | जुगुप्सन्ते |
| मध्यम | जुगुप्ससे | जुगुप्सेथे | जुगुप्सध्वे |
| उत्तम | जुगुप्से | जुगुप्सावहे | जुगुप्सामहे |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट् (आत्मने.): जुगुप्सते · लिट् (आत्मने.): जुगुप्साञ्चक्रे · लुट् (आत्मने.): जुगुप्सिता · लृट् (आत्मने.): जुगुप्सिष्यते · लोट् (आत्मने.): जुगुप्सताम् · लङ् (आत्मने.): अजुगुप्सत · विधिलिङ् (आत्मने.): जुगुप्सेत · आशीर्लिङ् (आत्मने.): जुगुप्सिषीष्ट · लुङ् (आत्मने.): अजुगुप्सिष्ट · लृङ् (आत्मने.): अजुगुप्सिष्यत
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: जुगुप्सन · ण्वुल्: जुगुप्सकः · तृच्: जुगुप्सिता · यत्: जुगुप्स्यः · तव्य: जुगुप्सितव्यः · अनीयर्: जुगुप्सनीयः · क्त: जुगुप्सितः · क्तवतु: जुगुप्सितवान् · शानच्: जुगुप्समानः · क्त्वा: जुगुप्सित्वा · ल्यप्: प्रजुगुप्स्य · तुमुन्: जुगुप्सितुम् · णमुल्: जुगुप्सम् · घञ्: जुगुप्सः · क्तिन्: जुगुप्स्ति · क्वसु: जुगुप्साम्बभूवान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| जुगुप्सते | गुप् धातु (भ्वादिगण, आत्मनेपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: जुगुप्सता (स्त्री.) — चतुर्थी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: गुप् + घञ् · तद्धित: जुगुप्स + तल् (भाववाचक) | जुगुप्सता (स्त्री.) — सम्बोधन, एकवचन · कृदन्त: गुप् + घञ् · तद्धित: जुगुप्स + तल् (भाववाचक) |
जुगुप्सते ➤ बचाना, संरक्षण करना, छिपाना, दोष लगाना, निन्दा करना
संस्कृत: गोपने निन्दायां च
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.२ सेकण्ड