अन्य सम्भावना: तद् (नपुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन
🌷 पदार्थः कोश-आधारित
तत् ➤ वह संस्कृत: परोक्षवर्त्तिवस्तुवाचकं सर्वनाम
📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
⚙️ व्याकरणम् स्वचालित
❖ सन्धिः
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
❖ समासः
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
❖ कृदन्तः
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
❖ तद्धितान्तः
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.० सेकण्ड
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पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है।
स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।