🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 05:26:48 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

त्वम्

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

त्वम्

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

त्वम्

अर्थ: तुम

संस्कृत: त्वम्

अंग्रेज़ी: You

व्युत्पत्ति: युष् + मदिक्

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. युष्मद् (त्रि.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन
  2. त्व (पुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन
  3. त्व (नपुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन
  4. त्व (नपुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन

📗 शब्द-रूपावली में पूरी तालिका

शब्दरूप — युष्मद् (सर्वनाम)

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमात्वम्त्वाम्यूयम्
द्वितीयात्वाम्त्वाम्त्वान्
तृतीयात्वयात्वाभ्याम्त्वाभिः
चतुर्थीतुभ्यम्त्वाभ्याम्त्वभ्यम्
पञ्चमीत्वत् / त्वद्त्वाभ्याम्त्वत् / त्वद्
षष्ठीतवत्वयोःत्वाकम्
सप्तमीत्वयित्वयोःत्वासु
सम्बोधनहे त्वम्हे त्वाम्हे यूयम्

रंगीन खाना = आपका लिखा रूप। रूप प्रतिमान (paradigm) से बने हैं; कुछ शब्दों के वैकल्पिक/आर्ष रूप भिन्न हो सकते हैं।

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
त्वम्युष्मद् (त्रि.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन
अन्य सम्भावना: त्व (पुं.) — द्वितीया विभक्ति, एकवचन | त्व (नपुं.) — प्रथमा विभक्ति, एकवचन

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

त्वम् ➤ तुम
संस्कृत: त्वम्

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
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