🕉️ 28 October 2026, Wednesday · 06:38:21 PM · CDSHARMA.IN

🕉️ श्लोकार्थ-बोधिनी

॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण

मार्जयतु

लम्बा गद्य (४००० अक्षर तक) भी लिख सकते हैं — वाक्य-वार विश्लेषण होगा। एक शब्द लिखने पर उसका अर्थ, सभी सम्भावित रूप, और पूरी शब्दरूप/धातुरूप तालिका दिखेगी।

🔎 पहचाना गया: एक शब्द

🔔 मूलशब्दः

दभ्नोति

🌸 पदच्छेदः स्वचालित

दभ्नोति

"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद

📖 शब्दकोशः — शब्द का पूर्ण परिचय कोश-आधारित

दभ्नोति

अर्थ: ठगना, वंचना करना

संस्कृत: दम्भने

अंग्रेज़ी: to deceive,to cheat

सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):

  1. दम्भ् धातु (स्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

  📘 धातु-रूपावली में सभी लकार

धातुरूप — दम्भ् (स्वादिगण) · अर्थ: ठगना, वंचना करना (दम्भने)

लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमदभ्नोतिदभ्नुतःदभ्नुवन्ति
मध्यमदभ्नोषिदभ्नुथःदभ्नुथ
उत्तमदभ्नोमिदभ्नुवःदभ्नुमः

दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: दभ्नोति · लिट्: ददम्भ · लुट्: दम्भिता · लृट्: दम्भिष्यति · लोट्: दभ्नुतात् · लङ्: अदभ्नोत् · विधिलिङ्: दभ्नुयात् · आशीर्लिङ्: दभ्यात् · लुङ्: अदम्भीत् · लृङ्: अदम्भिष्यत्

प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: दम्भन · ण्वुल्: दम्भकः · तृच्: दम्भिता · ण्यत्: दम्भ्यः · तव्य: दम्भितव्यः · अनीयर्: दम्भनीयः · क्त: दब्धः · क्तवतु: दब्धवान् · शतृ: दभ्नुवन् · स्य-शतृ: दम्भिष्यन् · क्त्वा: दब्ध्वा · ल्यप्: प्रदभ्य · तुमुन्: दम्भितुम् · णमुल्: दम्भम् · घञ्: दम्भः · क्तिन्: दब्धि · क्वसु: देभिवान्

🌹 पदपरिचयः स्वचालित

पदम्विवरणम्
दभ्नोतिदम्भ् धातु (स्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

🌷 पदार्थः कोश-आधारित

दभ्नोति ➤ ठगना, वंचना करना
संस्कृत: दम्भने

📚 अमरकोश-सम्बन्धः अमरकोश

इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।

⚙️ व्याकरणम् स्वचालित

❖ सन्धिः

इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।

❖ समासः

कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।

❖ कृदन्तः

कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।

❖ तद्धितान्तः

कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।

विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड

⚑ कोई विश्लेषण गलत लगा? सूचित करें — इससे साधन सुधरता है
यह साधन कैसे काम करता है: सब कुछ इसी वेबसाइट के सर्वर पर होता है — कोई बाहरी API/AI नहीं, आपका श्लोक कहीं भेजा या सहेजा नहीं जाता। पदच्छेद पाणिनीय सन्धि-नियमों के उल्टे प्रयोग से, पदपरिचय लगभग ७.५ लाख शब्द-रूपों व १.२ लाख प्रातिपदिकों के कोश से, अर्थ आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश व अमरकोश से, और अन्वय विभक्ति-क्रम के नियमों से बनता है। स्वचालित होने से कहीं-कहीं विकल्प गलत चुना जा सकता है (हर पद के "अन्य सम्भावना" देखें); श्रीमद्भागवत के श्लोकों पर साइट की जाँची हुई टीका दिखती है।
शब्द-डेटा साभार: ashtadhyayi.com (शब्दरूप, धातुरूप, आप्टे संस्कृत-हिन्दी कोश, अमरकोश) · सूत्र-लिंक: लघुसिद्धान्तकौमुदी।
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