॥ श्लोकानां विश्लेषिका ॥ — पदच्छेद, पदपरिचय, पदार्थ, अन्वय, भावार्थ व व्याकरण
"+" = एक ही लिखित शब्द के भीतर सन्धि-विच्छेद · डैश (-) वाले = समास का पूर्वपद
अर्थ: बढ़ना, बुद्धि होना
संस्कृत: वृद्धौ
अंग्रेज़ी: to grow, to prosper
सम्भावित विश्लेषण (सबसे सम्भावित पहले):
लट् लकार, परस्मैपद (कर्तरि):
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम | दर्हति | दर्हतः | दर्हन्ति |
| मध्यम | दर्हसि | दर्हथः | दर्हथ |
| उत्तम | दर्हामि | दर्हावः | दर्हामः |
दसों लकार (प्रथम पुरुष, एकवचन): लट्: दर्हति · लिट्: ददर्ह · लुट्: दर्हिता · लृट्: दर्हिष्यति · लोट्: दर्हतात् · लङ्: अदर्हत् · विधिलिङ्: दर्हेत् · आशीर्लिङ्: दृह्यात् · लुङ्: अदर्हीत् · लृङ्: अदर्हिष्यत्
प्रमुख कृदन्त: ल्युट्: दर्हण · ण्वुल्: दर्हकः · तृच्: दर्हिता · तव्य: दर्हितव्यः · अनीयर्: दर्हणीयः · क्त: दृहितः · क्तवतु: दृहितवान् · शतृ: दर्हन् · स्य-शतृ: दर्हिष्यन् · क्त्वा: दर्हित्वा · ल्यप्: प्रदृह्य · तुमुन्: दर्हितुम् · णमुल्: दर्हम् · घञ्: दर्हः · क्तिन्: दृग्धि · क्वसु: ददृह्वान्
| पदम् | विवरणम् |
|---|---|
| दर्हति | दृह् धातु (भ्वादिगण, परस्मैपद) — लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन अन्य सम्भावना: दर्हत् (नपुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: दृह् + शतृ | दर्हत् (पुं.) — सप्तमी विभक्ति, एकवचन · कृदन्त: दृह् + शतृ |
दर्हति ➤ बढ़ना, बुद्धि होना
संस्कृत: वृद्धौ
इस शब्द के प्रातिपदिक अमरकोश की पर्याय-सूची में नहीं मिले (क्रिया, अव्यय, सर्वनाम व नाम प्रायः अमरकोश में नहीं होते)।
इस श्लोक में शब्दों के भीतर कोई सन्धि नहीं पहचानी गई।
कोई समस्त पद नहीं पहचाना गया (या पूरा सामासिक शब्द कोश में सीधे मिल गया)।
कोई कृदन्त पद नहीं पहचाना गया।
कोई तद्धितान्त पद नहीं पहचाना गया।
विश्लेषण-समय: ०.१ सेकण्ड